कोष्टी समाज अहमदाबाद के बारे में

वस्त्रकार समाज – कोष्टी

विवरण एवं सन्देश

प्राचीन काल से ईस परम पवित्र भारत भूमि पर ईस युग तक एसे अनादिक परिवर्तन हुए कि ईस विशाल देश में हम अपना अतीत भूल बैठे हैं । ईसी वजह से हम सब एक ही व्रक्ष कि अनेक शाखाएँ होते हुए प्रदेश, प्रान्त स्थानानुसार विभक्त भावना संजोए बैठे हैं। विस्म्रत इतिहास से ही हम अपनी एक्ता खो बैठे हैं। ईस देश में हुए अनेक विदेशी आक्रमणो से भी "एक समाज" बिखर गया है। और जो भी साहित्य उपलब्ध था उसे भी विदेशी सत्ताधारीयों ने ईस "एक समाज" को विभक्त करने हेतु तोड़-मरोड़कर छोटे- छोटे स्तर पर विद्वेष फ़ैले इसी एक उद्देश्य से पेश किया।

आज हमें गर्व है कि हम जान गये हैं कि हम सब एक ही समाज के विभिन्न अंग है।

मार्कण्डेय पुराण यह प्राचीन सुत्र है। इसी आदि ग्रंथ में वस्त्रकार समाज की उत्पत्ति, निर्मिती कार्य परम्परा तथा संस्कृति का दर्शन है। यह मूल ग्रंथ तेलगु भाषा में है इसी कारण अन्य भाषिको में इस महान ग्रंथ के बारे में जानकारी नहीं है। इसी आधार पर हम जान गये हैं कि हमारे आदि पुरूष महर्षि मार्कण्डेय थे। आज जहाँ ग़ढ़चिरोली जिला महाराष्ट्र में जिस तपोवन भूमि पर मार्कण्डेय मंदिर स्तिथ है यही इस महान महर्षि ने यज्ञ किया था। यहाँ प्रत्येक वर्ष शिवरात्री पर्व पर यात्रा आयोजित है। इसमें देश के कोने-कोने से लाखो लोग (यात्री) पधारते हैं। भक्ति भाव से विनम्र दर्शन करते हैं। इसी "मार्कण्डेय पुराण" से हम 11 करोड़ वस्त्रकार आज एक सुत्र में आना चाहते हैं।

उत्तर, दक्षिण, पुर्व और पश्चिम में चारो ओर जिस समाज का विस्तार हुआ वह वस्त्रकार समाज चाहे वह ग्रढ़ेवाल हो, तंतुवाय हो, कुशवाह हो, कोष्टा, कोष्टी, हलवा, साड, साळी; स्वकुळ साळी; सालेवार देवांगन, पद्मशाली, बनकर, कोली, कोरी हो इस कुशय वंश का विस्तार इन निम्न चालीस शाखाओ में है।

1) कुशय 2) कुशटी 3) कोष्ठी 4) कोष्ठा 5) कुशवाह 6) बाल्मिकी या कुश्वाह 7) देवांग 8) सर्वांग 9) हलवे (हलवा-हलवी) 10) गढ़ेवाल 11) मराठी 12) कानड़ी 13) लिंगायत 14) तेलगू 15) निळ्कंठ 16) वागळ 17) बाघ 18) यगुठिया 19) भात 20) भत पहाड्या 21) चौधरी 22) चोर या चोळ 23) गोही 24) खंडा 25) कुरम (कुर्मी) 26) सानक 27) नाग 28) सेन या सना 29) देबंग हलवे 30) हाटगर 31) जुनरे 32) खतावत 33) कुरनावळ 34) पचनावळ 35) विलेजादर 36) पडसल विजादर 37) सामन्ती 38) पुरूषोत्तमीय या परासुत्रया 39) सालेबार 40) लाड़ (सन्दर्भ: कम्पाउन्डर भगवानसिंह बोकड़े इटावा उत्तरप्रदेश )

इन शाखाओ से जो गोत्र संबंधीत सै वे है :

1) सदाफ़स 2) पग्वासे 3) सेंदरे(शिन्दे) 4) बारापात्रे 5) गरकटे या गरकटा 6) निमजे या निमज्जा 7) हिडाऊ या हिप्रया 8) लिखारे या लिखार, निखारु निखारे, निखारिया 9) ठोलका 10) ठोसर 11) गोखे या गोखा 12) कोहले कोलीया, कमळेश कोस्हेकर, कोल्हट्कर कोहलीया 13) कुल्हाड़ीया 14) निनावे 15) सोनकुसरे

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